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14 पैसे से 35 रुपये तक पहुंचा शेयर, निवेशकों को मिला जबरदस्त फायदा

नई दिल्ली

शेयर बाजार में कई ऐसे स्टॉक हैं जिन्होंने लॉन्ग टर्म में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। ऐसा ही एक स्टॉक-नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड है। इस स्टॉक की कीमत पांच साल पहले 14 पैसे थी, जो अब 35 रुपये के स्तर पर है। इस पांच साल की अवधि में शेयर ने 24970% से अधिक का रिटर्न दिया है। रकम के हिसाब से इस रिटर्न की बात करें तो अगर किसी निवेशक ने पांच साल पहले एक लाख रुपये निवेश किया था तो अब उसकी रकम लगभग 2.50 करोड़ रुपये हो गई होगी।

शेयर का परफॉर्मेंस
नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर की बात करें तो 34.08 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले करीब ढाई पर्सेंट चढ़कर 34.90 रुपये पर पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान शेयर 35.69 रुपये पर पहुंच गया। 17 फरवरी 2026 को शेयर 46 रुपये पर था, जो 52 हफ्ते का हाई भी है। सिंतबर 2025 में शेयर 17 रुपये पर था। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बता दें कि नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साल 2024 में स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू का ऐलान किया था। स्प्लिट के तहत एक शेयर को 10 टुकड़ों में बांटा गया था तो एक शेयर के बदले एक बोनस शेयर मिलेगा।

शेयरहोल्डिंग पैटर्न
FY26 की मार्च तिमाही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमोटर की हिस्सेदारी 53.81 प्रतिशत पर स्थिर रही। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs की हिस्सेदारी साल-दर-साल (YoY) 4.25 प्रतिशत से गिरकर 0.18 प्रतिशत रह गई जबकि घरेलू निवशकों यानी DIIs की हिस्सेदारी 0.07 प्रतिशत पर बनी रही। पब्लिक शेयरहोल्डिंग 41.86 प्रतिशत से बढ़कर 45.94 प्रतिशत हो गई, जो कंपनी में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।

हाल ही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने बोर्ड की बैठक में बड़े बदलाव की घोषणा की। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अनिल कुमार ने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण अपना इस्तीफा दे दिया है, जो 20 अप्रैल 2026 को कारोबार समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया। उनके स्थान पर बोर्ड ने नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश पर शीतल सोनी को 21 अप्रैल 2026 से कंपनी की नई CFO नियुक्त कर दिया है। यह जानकारी सेबी (LODR) रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी गई है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे
FY26 की दिसंबर तिमाही में परिचालन से राजस्व 1.04 प्रतिशत बढ़कर 290 करोड़ रुपये हो गया और परिचालन मार्जिन आधार पर 11 प्रतिशत पर स्थिर रहा। इसके साथ ही, नेट प्रॉफिट 31 करोड़ रुपये हो गया। EPS (प्रति शेयर आय) में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह 1.06 रुपये हो गया।

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