Uttar Pradesh

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप सफलतापूर्वक संपन्न

लखनऊ

रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, उत्तर प्रदेश तथा भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के इन-स्पेस और नगर विकास विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रूपाम सभागार में हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग, जियोस्पेशियल इंडस्ट्री और प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने इन-स्पेस के विशेषज्ञों और देश भर से आए इंडस्ट्री पार्टनर्स से आग्रह किया कि आधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग प्रदेश के किसानों की खेती-बाड़ी सुधारने, सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में पैदावार बढ़ाने तथा सूखा और बाढ़ से बेहतर ढंग से निपटने में किया जाए। उन्होंने गवर्नेंस, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा नेटवर्क तथा सुरक्षित पुलों, सड़कों और नहरों की वैज्ञानिक प्लानिंग में भी इन तकनीकों के इस्तेमाल पर बल दिया, ताकि विकसित उत्तर प्रदेश 2047 का संकल्प पूरा हो सके।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश के समस्त भूखंडों के जियोटैगिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को अपने खेत की सही बाउंड्री की जानकारी मिल सकेगी और भूमि विवादों का निस्तारण आसान होगा। उन्होंने भवन कर के लिए शत-प्रतिशत घरों की मैपिंग स्पेस एप्लीकेशंस के माध्यम से कराने की भी बात कही, ताकि नगर विकास विभाग अपने संसाधनों में वृद्धि कर सके।

इस पूरे आयोजन में उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। विभाग ने न केवल इस कार्यशाला की परिकल्पना और सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया, बल्कि रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर के माध्यम से कृषि, वन, जल, भू-संसाधन, शहरी प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपग्रह आधारित तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाया। प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी, जबकि विशेष सचिव एवं आरएसएसी-यूपी निदेशक रमेश चन्द्र ने स्पेस टेक्नोलॉजी को नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर प्रदेश के विकास को नई गति देने का आह्वान किया।

कार्यशाला में रिमोट सेंसिंग सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिरुद्ध उनियाल ने खनिज, जल और आपदा प्रबंधन पर, वैज्ञानिक आलोक सैनी ने शहरी विकास एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर तथा डॉ. पी.पी.एस. यादव ने पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। नगर विकास, आवास, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, वन, ग्रामीण विकास सहित प्रदेश के 50 से अधिक विभागों और जनपदों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। 22 इंडस्ट्री पार्टनर्स ने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए, जबकि 75 प्राइवेट फर्मों ने सक्रिय भागीदारी की। इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिकों और कई जनपदों के जिलाधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया।

अंतिम सत्र में प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और स्पेस एप्लीकेशंस से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच राउंड टेबल चर्चा हुई, जिसमें विभागों की समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर विस्तार से बातचीत हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निरंतर और दूरदर्शी प्रयासों से उत्तर प्रदेश आज अंतरिक्ष तकनीक को ज़मीनी स्तर पर अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। यह कार्यशाला सुशासन, उत्पादकता और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम साबित हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button