Uttar Pradesh

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं गए कांग्रेसी और सपाई, भय था कि कहीं जालीदार टोपी न छिटक जाएः मुख्यमंत्री

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास व रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रण के बावजूद कांग्रेसी व सपाई नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोटबैंक दिखाई देता था। इन्हें भय था कि कहीं जालीदार टोपी छिटक न जाए। सीएम ने चेताया कि रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष (1926-2026) के उद्घाटन अवसर पर जन समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सीएमएस स्कूल, गोमतीनगर विस्तार में आयोजित समारोह में अशोक सिंहल के जीवन पर डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। सीएम ने कहा कि सिंहल जी ने श्रीराम जन्मभूमि के ‘प्राण’ के रूप में अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने जो ज्वाला प्रज्ज्वलित की थी, वह रामजन्मभूमि मात्र के लिए नहीं है, बल्कि हर मानबिंदु की प्राण प्रतिष्ठा के लिए है। गुलामी के हर चिह्नों को समाप्त करने के लिए हमें एकजुट होकर कार्य करना है।

बाबर के भक्तों की साजिशों को नाकाम करेंगे बजरंग बली के भक्त

सीएम ने आरोप लगाया कि रामद्रोही अयोध्या को बदनाम करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। राममंदिर का विरोध और रामभक्तों पर गोलियां चलाने वाले गाहे-बगाहे अपने को राम भक्त ठहराने का प्रयास कर रहे हैं, यह विश्व हिंदू परिषद की वैचारिक विजय है। उन्होंने बजरंगियों को चेताया कि रामकाज में कालेनमि भी घुसेंगे, इनसे सावधान रहना। बाबर के भक्त आपको अपमानित करने का प्रयास करेंगे, लेकिन बजरंग बली के भक्तों को इनकी साजिश को सफल नहीं होने देना है। 

अयोध्या को अपमानित करने वाले हमसे पूछ रहे प्रश्न

सीएम ने कहा कि रामजन्मभूमि का मामला जब न्यायालय में पहुंचा तो अशोक जी की टीम में तथ्यों व प्रमाण के साथ अधिवक्ता, पुरातत्वविद, विषय विशेषज्ञ होते थे तो दूसरी तरफ कांग्रेस, सपाइयों व वामपंथियों के अनर्गल प्रलाप व झूठे तथ्य होते थे। वे साजिश करते थे कि राममंदिर के पक्ष में फैसला न आए। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दिया था कि राम-कृष्ण का कोई वजूद नहीं है। जिन्होंने हिंदु समाज को अपमानित किया, वे लोग हमसे अयोध्या के बारे में प्रश्न पूछ रहे हैं।

देश, सनातन और हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए अशोक जी का सर्वस्व समर्पित था

सीएम योगी ने कहा कि अशोक जी ने जिस ज्योति को 1980 के दशक में प्रज्ज्वलित किया था, वह ज्वाला बनकर सकल हिंदू समाज के संरक्षण व संवर्धन के लिए अहर्निश लगी हुई है। अशोक जी से कोई जीवन का उद्देश्य पूछता था तो वह कहते थे कि तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूं देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूं। यह भाव अपने लिए नहीं बल्कि देश, सनातन, एकता-अखंडता और सकल हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए था। 

सनातन की सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे
मुख्यमंत्री ने अशोक सिंहल के जीवन को याद करते हुए कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के दौरान वह आरएसएस के संपर्क में आए। उन्होंने देश व सनातन धर्म के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने आरएसएस के प्रचारक-कार्यकर्ता के रूप में काम किया। उस समय कोई मानने को तैयार नहीं था कि भारतीय जनसंघ आएगा और केंद्र-राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। उनका एक ही ध्येय था कि सनातन धर्म पर आंच नहीं आने देंगे और इसकी सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे। 

500 वर्ष तक चुप नहीं बैठा समाज 

सीएम योगी ने कहा कि 1528 में प्रभु श्रीराम के मंदिर को तोड़कर विदेशी आक्रांता ने गुलामी का ढांचा बना दिया। इस 500 वर्ष में हिंदू समाज, धर्माचार्य, संत, नागा, सिखवीर, युवा, नारी, राजा कोई चुप नहीं बैठा। हर व्यक्ति निरंतर सिर पर कफन बांधकर रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए टूट पड़ता था। वे रामजन्मभूमि के लिए बलिदान देते रहे। 

हिंदू समाज को एक मंच पर लाया सिंहल जी ने 

सीएम ने कहा कि अवध क्षेत्र के दर्जनों गांव ऐसे थे, जिन्होंने 500 वर्ष तक चप्पल व साफा नहीं पहना। उस समय ताकत विभाजित थी, हम एकजुट होकर लड़ नहीं पा रहे थे। एक पक्ष मजबूत होता था तो दूसरा कमजोर। तब भी तोड़ने वाले विरोधियों व साजिशकर्ताओं की कमी नहीं थी। हिंदू समाज के पास उस समय भी शक्ति व सामर्थ्य था, सभी लोग लड़कर उसे वापस ले सकते थे, लेकिन उन्हें एक मंच पर लाने का अभाव था। अशोक सिंहल ने इस नेतृत्व की कमी को पूरा किया। 

जब तक राम का काम नहीं, तब तक विश्राम नहीं 

सीएम ने कहा कि 1982 में अशोक जी को जब विहिप का दायित्व मिला। 1983 में राम जन्मभूमि मुक्त यज्ञ समिति का गठन हुआ, तब उनके जीवन का एक ही संकल्प था कि जब तक राम का काम नहीं होगा, तब तक विश्राम नहीं लूंगा। उन्होंने बिना रुके, झुके, डिगे चरैवेति-चरैवेति को जीवन का मंत्र बनाया और संतों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बिखरे हुए समाज को एकजुट किया और वनवासी क्षेत्रों व मलिन बस्तियों में एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी की। गोरखनाथ मंदिर में ही विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय के एक कमरे में उन्होंने पूर्वोत्तर के बच्चों को लाकर पढ़ाने की व्यवस्था प्रारंभ की। 

रामद्रोही सरकार ने जब गोली चलाई, तब अशोक जी की सिंह-गर्जना सुनाई दी
सीएम ने कहा कि 2 नवंबर 1990 को रामधुन गाते भक्तों पर तत्कालीन रामद्रोही सरकार ने लाठीचार्ज व गोलियां चलवाईं, तब अशोक सिंहल जी सीना तानकर खड़े हो गए। केसरिया गमछे व युवाओं की हुंकार से उनका मन प्रफुल्लित होता था। संतुष्टि है कि अशोक जी के सान्निध्य में हमने राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। उनका सपना अब भव्य राम मंदिर के रूप में दिख रहा है। 

जो कहा, करके दिखाया
सीएम ने कहा कि मेरे गुरुदेव अवेद्यनाथ जी महाराज श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। अशोक सिंहल जी के साथ गोरखपुर व कारसेवकपुरम में राम मंदिर आंदोलन, निर्माण आदि को लेकर लगातार बैठकें होती थीं। सौभाग्य है कि अशोक जी के सपने को आज त्रेतायुगीन अयोध्या के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर हमें प्राप्त हुआ। कोई भी वाणी मंत्र तब बनती है, जब उसके वाचन व आचरण करने वाले में अंतर नहीं होता। अशोक जी ने जो कहा, वह करके दिखाया। 

अब 5 लाख से अधिक लोग एक साथ कर सकते राम की पैड़ी में स्नान

सीएम ने कहा कि पहले अयोध्या में परिक्रमा करने पर रोक लगती थी, आज वहां भव्य दीपोत्सव होता है। अयोध्या ने पांच सौ वर्ष तक अपमान व उपेक्षा झेली है। वहां सड़क, बिजली, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। राम जी की पैड़ी में जल सड़ता था। 2017 में सरकार बनी तो तत्कालीन जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने राम की पैड़ी को ऐसा बना दिया, जैसे हरिद्वार में हर की पैड़ी। अब 5 लाख से अधिक श्रद्धालु एक साथ राम की पैड़ी में स्नान कर सकते हैं।  

अयोध्या सोलर सिटी बन गई

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस अयोध्या में संकरी व टूटी गलियां थी, वहां अब रामपथ, धर्मपथ, भक्ति पथ व जन्मभूमि पथ फोरलेन से जुड़े हैं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, मां शबरी के नाम पर भोजनालय, निषादराज के नाम पर यात्री विश्रामालय हैं। संतों के नाम पर मंदिर-मूर्तियां भी हैं। कभी अंधेरे में रहने वाली अयोध्या अब सोलर सिटी बन गई है। 

7700 से अधिक गोशाला में 16 लाख गायों का संरक्षण कर रही सरकार 
सीएम ने कहा कि अशोक जी श्वेत वस्त्र में जितने प्रखर सनातनी थे, अंतःकरण से उतने कोमल हृदय के थे। गोरक्षा पर चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि पहले यूपी में अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थी। 2017 में ये बूचड़खाने बंद हो गए। उप्र में सर्वाधिक सख्त कानून बनाया गया और 7700 से अधिक गोशाला का निर्माण कराया गया। हम यहां 16 लाख गायों का संरक्षण कर रहे हैं। हर गाय के संरक्षण के लिए हर महीने 1500 रुपये देते हैं। जो लोग अवैध बूचड़खाने संचालित कर रहे थे, गोमाता की तस्करी करा रहे थे। उनसे प्रश्न पूछिए। हमने अशोक जी से जो सीखा, उसे धरातल पर उतारा है। 

गो हमारी माता, पशु कहने वालों की बुद्धि पशुवत

सीएम ने कहा कि नकलची गाय को पशु घोषित करने का ज्ञापन देते हैं। जो गो को पशु कह रहे हैं, उनकी बुद्धि पशुवत है। इस मुद्दे पर किसी को प्रश्न नहीं खड़ा करने देना चाहिए। सीएम ने अपील की कि भारतीय नस्ल की गोसेवा करें, पुण्य अर्जित करें और अशोक जी के संकल्पों के साथ जुड़कर संतों के सान्निध्य में राष्ट्र रूपी यज्ञ को मजबूती प्रदान करें। 

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल, संत श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी, रविंद्र कीर्ति स्वामी जी, भंते शीलरत्न जी, सरदार निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्य गिरि, विहिप के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, सीएमएस की संस्थापक भारती गांधी आदि की मौजूदगी रही।

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