सक्षम भारत–समर्थ भारत’ के तहत दिव्यांगजनों को नि:शुल्क ई-साइकिल वितरण

भोपाल
सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा संवेदना विकास एवं अनुसंधान मण्डल (सक्षम) तथा एल्टियस (Altius) इन्फ्रा के सहयोग से “लाइवलीहुड ऑन व्हील्स” कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांगजनों को नि:शुल्क ई-साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें रोजगार एवं आजीविका से जोड़ना तथा उनके जीवन को अधिक सुगम एवं सम्मानजनक बनाना है। एल्टियस इन्फ्रा के सहयोग से सक्षम संगठन द्वारा संचालित इस पहल के अंतर्गत मध्यप्रदेश के तीनों प्रांत- मध्य भारत, मालवा एवं महाकौशल के अस्थिबाधित दिव्यांगजनों को 139 ई-साइकिलों का वितरण किया जा रहा है।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दिव्यांगजन अद्भुत क्षमता और आत्मबल के प्रतीक हैं। समाज और शासन का दायित्व है कि उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि “सक्षम भारत–समर्थ भारत” अभियान दिव्यांगजनों को सम्मान और स्वावलंबन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि राष्ट्र के उत्थान एवं भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को लेकर सभी विभाग एवं समाज के लोग मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित एवं समर्थ भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में वर्ष 2047 तक विभिन्न संस्थाएं और सामाजिक संगठन निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने “सक्षम” संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए संस्था को बधाई दी। मंत्री कुशवाह ने दिव्यांग हितग्राहियों को वितरित
ई-साइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान हितग्राहियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंत्री कुशवाह ने कहा कि ईश्वर की साधना और पूजा से जितना पुण्य प्राप्त नहीं होता, उससे अधिक पुण्य किसी दिव्यांगजन को सक्षमता और आत्मनिर्भरता प्रदान करने से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन दिव्यांगजनों के कल्याण, पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए संवेदनशीलता के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। ई-साइकिल वितरण जैसी पहल दिव्यांगजनों के आवागमन को सुगम बनाते हुए उन्हें रोजगार एवं आत्मसम्मान से जोड़ने का कार्य करेगी।
कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही।




