मध्यप्रदेश

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में कुटीर एवं ग्रामोद्योग की उल्लेखनीय भूमिका : राज्य मंत्री जायसवाल

भोपाल. 
कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के संकल्प को साकार करने में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की भूमिका अत्यंत उल्लेखनीय है। विभाग के प्रयासों से प्रदेश के लाखों कारीगर, बुनकर, शिल्पी और ग्रामीण उद्यमी स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं।

राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, संत रविदास स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री कारीगर समृद्धि योजना और एक जिला-एक उत्पाद जैसे कार्यक्रमों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। पिछले तीन वर्षों में विभाग के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए।

प्रमुख उपलब्धियां
हथकरघा एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा : चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट और गोंड पेंटिंग जैसे पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला।
‘एमपी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम’ के माध्यम से 1800 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया गया।
माटी कला एवं बांस शिल्प का पुनरुद्धार : कुम्हारों और बांस शिल्पियों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया गया। इससे 35 हजार से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिला।
महिला सशक्तिकरण : स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 1.2 लाख महिलाओं को अगरबत्ती, मसाले, अचार, दोना-पत्तल और सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों से जोड़ा गया।
डिजिटल मार्केटिंग : ‘मृगनयनी’ और ‘ओडीओपी’ उत्पादों को एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और जीईएम पोर्टल से जोड़कर कारीगरों को देशभर का बाजार उपलब्ध कराया गया।

राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विजन को कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग जमीन पर उतार रहा है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव का हुनर, हर हाथ को काम मिले। उन्होंने कहा कि विभाग जिला स्तरीय क्लस्टर विकास, कारीगरों के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और निर्यात प्रोत्साहन पर विशेष फोकस करेगा, जिससे मध्यप्रदेश के पारंपरिक हुनर को वैश्विक पहचान बनाए रखने में मदद मिलेगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button