Uttar Pradesh

अयोध्या के कुम्हारों की चमकी किस्मत, दीपोत्सव से बढ़ा रोजगार

दीपोत्सव 2026

दीपोत्सव के लिए कुम्हार परिवारों को मिले बड़े ऑर्डर, युवा भी पारंपरिक काम से जुड़कर बना रहे भविष्य

इलेक्ट्रिक चाक से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार, स्थानीय स्तर पर बढ़े आत्मनिर्भरता के अवसर

राम की पैड़ी पर 7 नवंबर को 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में पहुंचे 17.64 लाख दीये

अयोध्या
अयोध्या में दीपोत्सव अब केवल आस्था और परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है, जिसका लाभ कुम्हार परिवारों को मिल रहा है। कभी रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने वाले इन परिवारों के युवा अब अपनी ही धरती पर पारंपरिक कला के जरिए आजीविका कमा रहे हैं। दीपोत्सव ने मिट्टी के दीये बनाने की परंपरा को नई पहचान देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।

युवा अब बाहर नहीं जाते, अपनी मिट्टी में बना रहे भविष्य
जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि दीपोत्सव शुरू होने के बाद से उनका पूरा परिवार लगातार दीये बनाने के काम में जुटा है। इस बार उन्हें एक लाख दीयों का ऑर्डर मिला था, जिसे समय से तैयार कर पहुंचा दिया गया। गांव के ही राजेश प्रजापति को दो लाख दीये बनाने का ऑर्डर मिला है। उनके अनुसार, परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस काम को पूरा करते हैं। राजेश प्रजापति बताते हैं कि पहले जहां पूरे महीने में मुश्किल से 20 से 25 हजार रुपये की कमाई हो पाती थी, वहीं अब दीपोत्सव के मौसम में ही लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है। बड़े ऑर्डर मिलने से परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है और युवा पारंपरिक मिट्टी कला से जुड़कर अपना भविष्य संवार रहे हैं। इस बार उन्हें दो लाख दीयों का ऑर्डर मिला था, जिसे समय से तैयार कर पहुंचा दिया गया।

इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ा उत्पादन, बेहतर हुई गुणवत्ता
कुम्हार परिवारों को इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराए जाने से दीये बनाने के काम में तेजी आई है। पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता और दीयों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड और सोहावल के ड्योढ़ी जैसे गांवों में कुम्हार परिवार दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। घरों में मिट्टी गूंथने, दीये बनाने और उन्हें सुखाने का काम लगातार चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव के दौरान मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय कारीगरों को बड़े ऑर्डर मिलने के अवसर बढ़े हैं। इससे पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने के साथ कुम्हार परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।

राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य
दसवें दीपोत्सव के अवसर पर इस बार 7 नवंबर को राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्वीन हो मेमोरियल पार्क में 17.64 लाख दीये घाट स्थित गोदाम में रखे गए हैं। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी तैयारियों में जुटे हैं। दीपोत्सव के दौरान व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को लगाया गया है।

पारंपरिक मिट्टी कला को मिल रहा नया अवसर
अयोध्या का दीपोत्सव स्थानीय कुम्हार परिवारों के लिए पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़ने का अवसर बन रहा है। मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग, बड़े ऑर्डर और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से कारीगरों को अपने काम का विस्तार करने में मदद मिल रही है। योगी सरकार के नेतृत्व में दीपोत्सव को व्यापक स्वरूप दिए जाने से स्थानीय कारीगरों की भागीदारी बढ़ी है और पारंपरिक मिट्टी कला को नई पहचान मिल रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button