मध्यप्रदेश

विरासत और विज्ञान का संगम डॉ. मोहन यादव के विजन में कृष्ण पाथेय-राम पथ से स्पेस टेक तक का सफर

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस वर्ष 25 मार्च को जब अपना जन्मदिन मना रहे होंगे, तो यह उनके वर्तमान कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन लेकर आएगा। 13 दिसंबर, 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इस वर्ष का जन्मदिन उनके वर्तमान कार्यकाल का आधा पड़ाव माना जा सकता है।

इन बीते दिनों में विभिन्न तरह की राजनैतिक अटकलबाजियों को गलत साबित करते हुए ना सिर्फ डॉ. मोहन यादव ने अभी तक का कार्यकाल सहजता से पूरा किया है बल्कि इस दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज दिन प्रतिदिन और भी मजबूत होती दिखी. देश के केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी उनके सहज रिश्ते दिखते हैं।

जन्मदिन हम सबको अवसर देता है अपनी पिछली उपलब्धियों को देखने का और एक नए संकल्प और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाने का. पर जब बात मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री की हो तो जाहिर है जन्मदिन पर उनके संकल्पों में पूरे प्रदेश के 8-8.50 करोड़ लोगों का भविष्य और प्रदेश के असीम विकास की संभावनायें भी निहित होंगी।

अच्छी बात यह है कि इस जन्मदिन के कई महीनों पूर्व डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र के आयोजन के जरिए प्रदेश की जनता को प्रदेश के विकास हेतु अपने विजन और रोडमैप से अवगत करा दिया। यह विशेष सत्र 17 दिसंबर, 2025 को आहूत किया गया था, जिसकी एक और विशेषता यह थी कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी इस विकास यात्रा में साथ चलने के लिए प्रेरित और आमंत्रित किया।

यह देखने और सुनने में सुखद था कि इस विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से कोई भी आरोप-प्रत्यारोप नहीं हुआ बल्कि ठीक उलट दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की सराहना करते हुए इस विकास यात्रा में अपनी भागीदारी की बात की।

किसी भी अन्य राज्य में विकास के लिए पक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह की सामूहिकता एक अजीब वाकया लग सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस तरह का पॉजिटिव माहौल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से संभव हुआ।

मध्यप्रदेश में विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए तथा इसकी महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के विज़न और विकास के रोडमैप में वह सब कुछ है, जो प्रदेश की आर्थिक उन्नति की दिशा दिखा रहा है। अगर राज्य का प्रशासनिक ढांचा मुख्यमंत्री की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप इस रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए एक संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो मध्यप्रदेश आने वाले समय में उद्योग, व्यापार, रोजगार, अध्यात्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और टूरिज्म के साथ 21वीं सदी के स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरे देश में एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।

इस रोडमैप में सबसे विशेष बात यह है कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और संरक्षित करते हुए 21वीं शताब्दी के विकसित भारत के उन आयामों पर काम करने का संकल्प है जो इस शताब्दी में हमारे जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित करने जा रहे हैं।

जहां तक समृद्ध विरासत और आधुनिकता के संगम की बात है तो अगर प्रदेश में पहली बार कृष्ण पाथेय पर काम हो रहा है, राम वन गमन पथ को गति दी जा रही है, सिंहस्थ की जोर शोर से तैयारी चल रही है तो साथ में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एमपी स्पेस-टेक पॉलिसी, 2026 और स्टेट एआई मिशन पर भी काम हो रहा है. यह पहली बार है जब प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा के उद्योग से खेती को बड़े पैमाने पर उन्नत बनाने की बात हो रही है.

इसी वर्ष 23 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि स्पेस टेक नीति-2026 से मध्यप्रदेश भारत का नया ‘स्पेस टेक’ हब बनेगा और इसी तरह भारत की नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश एक सशक्त भूमिका निभाएगा.

इसके पहले 15 जनवरी, 2026 को भोपाल में क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें सरकार ने शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन और औद्योगिक स्वचालन में एआई के व्यावहारिक और प्रभावशाली उपयोग को प्रदर्शित किया था.

इस एआई इम्पैक्ट सम्मेलन का महत्व इसलिए भी था क्योंकि नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 जो फरवरी में आयोजित किया गया और जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, में मध्यप्रदेश ने भी भाग लिया और इस एआई इम्पैक्ट समिट का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कैसे एआई हमारे जीवन के हर क्षेत्र में बहुत बड़े स्तर पर इम्पैक्ट डालने वाला है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में सही समय पर एआई पर कार्य होना आरंभ हुआ है।

उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ में भी एआई का उपयोग इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में दिख सकता है।

डॉ. मोहन यादव के रोडमैप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता है. मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों में राज्य के बजट को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. वर्तमान में राज्य की विकास दर 14-15 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है. इस गति को बनाए रखने के लिए एमएसएमई (MSME) और औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मध्यप्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सके।

अपने भाषण में डॉ. मोहन यादव ने कहा, “अध्यक्ष महोदय, जब हम आपसे विजन डॉक्यूमेंट 2047 की बात कर रहे हैं, तो यह विजन डॉक्यूमेंट कोई कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हमारा व्यक्तिगत संकल्प भी है. 2047 तक मध्यप्रदेश का युवा, महिला, सभी वर्गों का इस प्रकार का माहौल बनेगा कि हमारे युवा और महिला नेतृत्व नौकरी देने वाले बनें, नौकरी लेने वाले नहीं, इस प्रकार के संकल्प से हम आगे बढ़ रहे हैं. मध्यप्रदेश 2047 का विजन डॉक्यूमेंट राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और नागरिक जीवन की गुणवत्ता को उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। हम अपनी इस सरकार के गठन के 2 वर्षों में लगभग 14-15% की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे हैं।”

प्रदेश की आर्थिक तरक्की के बारे में अपने विजन को बजट के उल्लेख के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “…सवा तीन लाख करोड़ से हम बजट को 5 साल में डबल करेंगे, अर्थात 2028 तक यह लगभग 7 लाख करोड़ के आसपास पहुंचेगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 7 का 14 होगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 14 का 28 होगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 28 का 56 होगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो सीधा 100 होगा. तभी तो हमने कहा कि 2047 तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हमारे राज्य की होगी।”

इस कार्यकाल में जिन निर्णयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का इंप्रिंट (imprint) दिखता है, वह है प्रशासनिक कसावट, किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही पर त्वरित कार्रवाई, विकास के रोडमैप को सिर्फ इंदौर या भोपाल तक सीमित नहीं करते हुए 'रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव' के जरिए विकास का विकेंद्रीकरण तथा राज्य के हर क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट और उद्योग लाने का प्रयास, कृषि कैबिनेट के जरिए किसान कल्याण की योजनाओं पर विशेष चर्चा तथा निर्णय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा को कृषि और प्रशासन में उपयोग करने की पहल, ग्रामीण परिवहन के लिए ग्रामीण बस सेवा शुरू करने का निर्णय जिससे गांव और शहर के बीच की दूरी कम हो तथा ग्रामीण मध्यप्रदेश विकास की रफ्तार पकड़ सके, इत्यादि।

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'चार स्तंभों'—युवा, महिला, गरीब और किसान—को आधार बनाकर डॉ. यादव ने चार विशेष मिशनों की घोषणा की है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प और रक्षाबंधन पर राशि बढ़ाना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके साथ ही, बिरसा मुंडा के सम्मान में 'धरती आबा योजना' के जरिए जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए सरकार ने विकास की गति बढ़ाई है।

इसी तरह केंद्र सरकार के नक्सल विरोधी अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार की डेडलाइन यानी 31 मार्च, 2026 के बहुत पहले दिसंबर में ही नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा कर दिया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 दिसंबर 2025 को राज्य से नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान करते हुए "लाल सलाम को आखिरी सलाम" कहा.

इस अवसर पर उन्होंने कहा, “मुझे इस बात का संतोष भी है और गर्व भी है. हमारे पुलिस के जवानों ने अपनी शहादत देते हुए भी इस काम को अंजाम दिया. यह बड़ी चुनौती थी. माननीय गृह मंत्री जी, माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि हम मार्च 2026 तक नक्सलवाद का सफाया करें. हमें इस बात का संतोष भी है और सुख भी है कि हमारे मध्यप्रदेश की पुलिस ने 11 दिसंबर को नक्सलवादियों के लाल सलाम को आखिरी सलाम कर दिया है।”

जाहिर है कि डॉ. मोहन यादव का 'विजन 2047' एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज है और मध्यप्रदेश की 8 करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। अब चुनौती इसके धरातल पर क्रियान्वयन की है, जिस पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य टिका होगा।

 

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