मध्यप्रदेश

चाइनीज मांझे पर नीति क्यों नहीं? इंदौर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, 25 मार्च तक समय

इंदौर

कोर्ट के आदेश के दो माह बाद भी शासन चाइनीज मांझे को लेकर नीति नहीं बना सका। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही स्वत: संज्ञान याचिका में बुधवार को शासन को इस बारे में बनाई गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय मांग लिया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि मुख्य सचिव ने 12 मार्च को इस संबंध में अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम 25 मार्च तक का समय दे रहे हैं। नीति तैयार कर इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाए। कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि न्यायमित्र द्वारा दिए गए सुझावों को भी नीति में शामिल किया जाए।

चाइनीज मांझे मामले में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की है। 11 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर इंदौर और आसपास के सभी जिलों में चाइनीज मांझा बनाने, बेचने, उपयोग करने को प्रतिबंधित कर दिया था।

12 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा था कि वह आदेशों का सख्ती से पालन करें और सुनिश्चित करे कि चाइनीज मांझे की वजह से कोई हादसा न हो, बावजूद इसके मकर संक्रांति के दिन इंदौर और आसपास के जिलों में कई हादसे हुए।

16 जनवरी को मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चाइनीज मांझे की वजह से हुए हादसों को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सख्ती के बावजूद हादसे हुए यह बहुत दुखद है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा था कि वे कोर्ट के आदेश और न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर चाइनीज मांझे को लेकर नीति तैयार करें। बुधवार को शासन को तैयार की गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय ले लिया।

सुनवाई के दौरान ये सुझाव आए थे सामने

  •     चाइनीज मांझे से घायल या मौत होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान होना चाहिए।
  •     चाइनीज मांझे के निपटान की नीति तय होना चाहिए।
  •     जब्त चाइनीज मांझे को मालखाने में रखने का कोई मतलब नहीं। इसे भस्मक भेजकर खत्म कराया जाए।
  •     ई-प्लेटफार्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित की जाना चाहिए।
  •     चाइनीज मांझे का ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रांसपोर्टरों का लायसेंस निरस्त किया जाए।
  •     चाइनीज बनाने, बेचने या उपयोग की सूचना देने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रविधान किया जाना चाहिए

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