मध्यप्रदेश

बायोएग्री को मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने पर होगा मंथन

भोपाल

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल में “मध्यप्रदेश की जैव-अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में बायोएग्री” विषय पर हितधारक परामर्श मंथन बैठक आयोजित हुई। मंथन का उद्देश्य राज्य में जीवन-विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा बायोएग्री इको सिस्टम के विकास के लिये एक कार्यान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने मे सहायता प्रदान करना है।

बैठक में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्योगों, स्टार्टअप्स, शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के 47 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में वेस्ट-टू-वेल्थ, प्रिसिजन एग्रीकल्चर एवं बायो-इनपुट्स, लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स, कृषि जैव-प्रौद्योगिकी सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।

संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि “बायो इकोनामी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान देश के अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश की तुलना में अत्यधिक कम है, जबकि अवसरों की बात करें तो वह मध्यप्रदेश में सर्वाधिक उपलब्ध है। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। बायोइकानामी के अन्य घटकों के साथ ही बायो एग्री कार्य, बायो एनर्जी, इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉआदि क्षेत्रों में काम करने की मध्यप्रदेश में अत्यधिक संभावनाएं हैं। प्रदेश में प्रमुख फसलों के साथ अनुमानित 30-35 मिलीयन टन सोयाबीन स्ट्रा, गेहूं स्ट्रा, धान और मक्के का वेस्ट प्रतिवर्ष उत्पादित होता है। इसका बहुत बड़ा भाग अभी ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होता। प्रदेश में पशुओं की बड़ी संख्या होने के कारण बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस की अपार संभावना है। 30 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र होने के कारण तेंदूपत्ता वन औषधीय पौधे और अन्य बायो बेस्ड मटेरियल आधारित उद्योग लगाने की अत्यधिक संभावना है।“

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर), भोपाल के निदेशक प्रो. गोबर्धन दास ने बायोएग्री क्षेत्र में संबंधित अपार संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा अभूतपूर्व रही है। इसे जैव-अर्थव्यवस्था में लागू करके प्रदेश का विकास किया जा सकता है। सुशासन संस्थान के मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार जैन ने बताया कि इस परामर्श बैठक से बायोएग्री आधारित मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, नीतिगत सुझाव, कौशल विकास एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन के लिये ठोस कार्ययोजना तैयार होने की अपेक्षा है, जो मध्यप्रदेश को जैव-अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। बाइएकोनोमी सेल के नोडल अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सूर्यवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया और आभार व्यक्त किया। 

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